Wednesday, 1 March 2017

यह सरकार बहुत ही अच्छी है इसका कार्य मोदी अच्छे हैं

वैश्विक स्तर पर 2016 की चौथी तिमाही में भारतीय उपभोक्ता सबसे ज्यादा आश्वस्त http://profit.ndtv.com/news/economy/article-indian-consumers-most-confident-globally-in-q4-2016-nielsen-1661597 via NMApp

Thursday, 16 February 2017

शीर्ष अमेरिकी एयरोस्पेस और रक्षा कंपनियों ने प्रधानमंत्री मोदी के 'मेक इन इंडिया' पहल का किया समर्थन

शीर्ष अमेरिकी एयरोस्पेस और रक्षा कंपनियों ने प्रधानमंत्री मोदी के 'मेक इन इंडिया' पहल का किया समर्थन http://www.businessworld.in/article/Top-American-Aerospace-Defence-Firms-Support-PM-Modi-s-Make-in-India-Initiative/15-02-2017-112978/ via NMApp

Saturday, 4 February 2017

Nmo is go

Check out BJP's task 'We Promised - We Delivered #BJP4Goa' https://www.youtube.com/watch?v=_16NX3YKGps on NM App

Friday, 20 January 2017

क्या चीनी सामान होगा बंद। चीनी समान के बराबर रुपए का समान बना पाएगा इंडिया

मुमकिन नहीं है चाइनीज सामानों पर पाबंदी: एक्सपर्ट्स

चीन के अड़ियल रुख के चलते न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की एंट्री खटाई में पड़ने के बाद से सोशल मीडिया में चाइनीज सामान पर बैन की मांग जोरों पर है। कुछ संगठन इसे लेकर देशभर में प्रदर्शन भी कर रहे हैं। हालांकि, जानकारों खासकर चाइना से ट्रेड करने वालों को इसकी दूर-दूर तक कोई संभावना नजर नहीं आती। एक तो देसी उत्पादन उस लेवल का नहीं है, जो सस्ते चीनी उत्पादों की भारी मांग और खपत की जगह ले सके, दूसरे चीन से आयात में बड़ी हिस्सेदारी सेमी-फिनिश्ड गुड्स और उपकरणों की भी है जिनपर रोक से ज्यादातर इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो जाएंगे। अलबत्ता, ई-कॉमर्स के चलते अब चाइनीज उत्पादों की सप्लाई और बढ़ने के आसार हैं।

फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल ऐंड मीडियम एंटरप्राइजेज (फिस्मे) के जनरल सेक्रटरी अनिल भारद्वाज ने बताया, 'न तो डब्ल्यूटीओ कानून इसकी इजाजत देते हैं और न ही भारत सरकार ऐसा करेगी। जो चीज हमारे यहां बनती ही नहीं, उसकी सीधी सप्लाई रोककर उसे दूसरे रास्तों से मंगाना समझदारी नहीं होगी। ऐसा हुआ तो एलईडी बल्ब से लेकर टीवी और दूसरे कई इलेक्ट्रॉनिक सामान चार से पांच गुना महंगे हो जाएंगे।' उन्होंने बताया कि फिलहाल चीन से सालाना 61 अरब डॉलर का सामान आता है, जो साल दर साल बढ़ता आ रहा है। अब जब ई-कॉमर्स कंपनियां सीधे चीन से माल लाने के विकल्प तलाश रही हैं और सरकार भी इस दिशा में बढ़ती दिख रही है, ऐसे बैन के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता।'

सदर बाजार में चाइनीज इम्पोर्टर और सुपर मार्केट ईवू में अरसे तक काम कर चुके पवन कुमार कहते हैं, 'इस तरह के बैन से चीन की माली सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके कुल एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी 5 पर्सेंट से भी कम है। उस पर से यहां आने वाला ज्यादातर माल अच्छी क्वॉलिटी का नहीं होता। कीमत के लिहाज से भारतीय उत्पाद उनका भी मुकाबला नहीं कर पा रहे, ऐसे में वह चीन से नहीं तो किसी और रास्ते से भारत आएगा।'

दिल्ली में चाइनीज गुड्स के सैकड़ों इम्पोर्टर अब अपनी दुकान बंद कर फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, ऐमजॉन, पेटीएम और दूसरे ई-टेलर्स को सप्लाई करने लगे हैं। इससे उनका वॉल्युम और मार्जिन दोनों बढ़ा है। फ्लिपकार्ट के सप्लायर विभव जैन कहते हैं, 'अभी ई-टेलर सीधे चीन से सामान नहीं मंगा सकते, वे स्थानीय इम्पोर्टर्स के जरिए बिक्री कर रहे हैं। चूंकि सरकार ई-कॉमर्स में एफडीआई नॉर्म्स को लचीला बना रही है, ऐसे में जल्द ही ये कंपनियां सीधे इम्पोर्ट और बिक्री कर सकेंगी। ऐसे में चाइनीज माल का आवक बढ़ने के ही आसार हैं।' ट्रेडर्स का यह भी कहना है कि सरकार ने खिलौने, डेयरी प्रॉडक्ट्स, पटाखे सहित कई चाइनीज चीजों पर पाबंदी लगा रखी है, इसके बावजूद ये सामान चोरी-छिपे आते रहे हैं

Thursday, 19 January 2017

आखिर सड़कों पर मौत कब तक ????

Smartlifestory

Dosto namaskar ek baar phir aap ka yaha par Swagat hai 

aaj mai aap ke liye Lekar Aaya Hoon ऐसी खबर जिसे देखकर आप चौंक जाएंगे

 हमारे देश में प्रतिमाह सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या कई देशों में प्रतिवर्ष मरने वालों से कहीं ज्यादा रहती है
वर्ष 2015 की 'रोड एक्सीडेंट रिपोर्ट' के अनुसार सड़क हादसों में देश में 1,46,133 लोगों की जानें गईं हैं।।।



इसके लिए राज्य सरकार को विशेष रुप से 'सड़क सुरक्षा उपकरण' लगाकर जनसंख्या व वाहनों की संख्या की बढ़ोतरी के  अनुरूप यातायात से जुड़े विभागों को विशेष संसाधन उपलब्ध करवाने होंगे ।
उनकी नफरी में भी वर्दी करनी होगी।
विडम्बना यह है कि पढ़े लिखे लोग भी चौराहे या मोड़ क
पर यदि ट्रैफिक का सिपाही नहीं खड़ा है तो भेड़ चाल की तरह चलते ही रहते हैं।
"गति सीमा" व "रुकिए" के निशान का शायद ही कोई ध्यान रखता है।
 दरअसल नियम को तोड़ने वालों, यातायात अधिकारियों व दलाल जो कानून पालना की बजाए मिलीभगत से मामला निपटाने में ज्यादा विश्वास रखते हैं , के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा जाना जरूरी है।
 अन्यथा नए मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2016 में किए जा रहे सख्त दंडात्मक प्रावधानों का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।।