Friday, 30 December 2016

गुड न्यूज़

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 हेलो दोस्तो आज आपका फिर से फिर से स्वागत है आज मैं आपके लिए लेकर आया हूं मोदी जी की न्यूज़ 
 मोदी जी ने सब के खाते में हजार हजार रुपए डाले हैं

तोहफा: मोदी सरकार ने लोगों के खाते में भेजे 1000-1000 रुपए
Live India


 25 दिसंबर को क्रिसमस की सौगात के रूप में पीएम मोदी ने ग्राहकों के लिए 'लकी ग्राहक योजना' की घोषणा की थी।
इस योजना के तहत कैशलेस व्यवस्था अपनाने वाले विजेताओं का चयन दैनिक एवं साप्ताहिक आधार पर किया गया।

जिन लोगों के अकाउंट में उपहार स्वरूप 1000 रुपये आए, वे अपनी खुशी जाहिर करने से खुद को रोक नहीं पाए। तमाम लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ख़ुशी का इजहार किया है।


लकी ग्राहकों के लिए दैनिक पुरस्कार :-
प्रतिदिन 15,000 लोगों को पुरस्कार मिलेगा|
हर व्यक्ति को 1000 रुपये मिलेंगे |
पुरस्कार 25 दिसम्बर से अगले 100 दिनों तक दिए जायेंगे |
लकी ग्राहकों के लिए साप्ताहिक पुरस्कार :-
ग्राहकों के लिए साप्ताहिक पुरस्कार की राशि 1 लाख रुपए, 10,000 रुपए और 5000 रुपए होगी |
लकी ग्राहकों के लिए मेगा पुरस्कार :-
Mega Draw 14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती के दिन होगा |
3 मेगा पुरस्कार दिए जाएंगे |
पहला पुरस्कार 1 करोड़ रुपये का होगा |
दूसरा पुरस्कार 50 लाख रुपये का |
और तीसरा पुरस्कार 25 लाख रुपये का होगा |
लकी ग्राहक योजना के लिए पात्रता :-
ये पुरस्कार उन ग्राहकों को दिए जाएंगे जो कैशलेस मोड / डिजिटल भुगतान (Cashless mode/ Digital Payment) का उपयोग कर भुगतान करेंगे | भुगतान निम्नलिखित में से किसी भी mode से किया जा सकता है :-
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Unified Payment Interface (UPI) :- यह मोबाइल एप्लिकेशन (Mobile App) आधारित भुगतान प्रणाली है |अधिकांश बैंकों ने अपने मौजूदा Mobile App में UPI को एकीकृत कर लिया है | SBI Pay, PNB UPI, Axis Pay, PhonePay ये सभी UPI App हैं |
USSD *99# Banking :- यह भुगतान प्रणाली उन लोगों के लिए है जिनके पास कोई Smartphone या Internet नहीं है | भुगतान की इस प्रणाली का उपयोग करने के लिए आपको अपने Feature phone से * 99 # डायल करने की जरूरत है |
Adhaar Enabled Payment System (AEPS) :- इस भुगतान प्रणाली में आपको फोन, इंटरनेट या हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है | इस प्रणाली में भुगतान माइक्रो ATM के द्वारा आपके Adhaar और Fingerprint का उपयोग कर किया जाता है |
Rupay Card :- यह Visa और Mastercard की तरह डेबिट या क्रेडिट कार्ड हो सकता है | NPCI ने इस Payment Gateway को विकसित किया है | सभी JanDhan खाता धारकों को इसी प्रकार के डेबिट कार्ड दिए गए हैं |
Digital Wallets जैसे- Paytm, Mobikwik, Freecharge, pockets, Buddy के माध्यम से भुगतान करने वाले ग्राहक इस योजना के लिए पात्र तब तक नहीं होंगे जब तक ग्राहक फंड ट्रांसफर की UPI Mode का उपयोग नहीं करता है | ऐसी कई Digital Wallet हैं जो UPI के साथ एकीकृत हैं | तो, अगर आप FreeCharge का उपयोग करें और UPI मोड के माध्यम से भुगतान करते हैं, तो आप Lucky Draw के लिए पात्र होंगे |
Mastercard या Visa डेबिट / क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करने वाले ग्राहक लक्की ग्राहक योजना के लिए पात्र नहीं होंगे |

Tuesday, 27 December 2016

Mummy- papa ko bhulna nhi

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दोस्तों फिर से आपका एक बार स्वागत है आज मैं आपको एक ऐसा वीडियो दिखाने जा रहा हूं जो सुनकर आपके आंसू निकल आएंगे यह वीडियो अपनी मम्मी और पापा  की याद दिलाएगा

Friday, 23 December 2016

नरेंद्र मोदी की हिस्ट्री

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हेलो दोस्तो आपका फिर से स्वागत है आज मैं आपके लिए लेकर आया हूं एक ऐसी महान शख्सियत के बारे में जानकारी जो आप अपने आंखों से देखें जरुर पढ़ें


भारत के १५वें प्रधानमन्त्री
पद बहाल
२६ मई २०१४
राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी
उत्तरवर्ती मनमोहन सिंह
गुजरात के १४वें मुख्यमन्त्री
पद बहाल
७ अक्टूबर २००१ – २२ मई २०१४
राज्यपाल सुन्दरसिंह भण्डारी
कैलाशपति मिश्र
बलराम जाखड़
नवलकिशोर शर्मा
एस. सी. जमीर
कमला बेनीवाल
पूर्वा धिकारी केशूभाई पटेल
उत्तरा धिकारी आनंदीबेन पटेल
जन्म 17 सितम्बर 1950 (आयु 66 वर्ष)
वड़नगर, गुजरात, भारत
राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी
जीवन संगी जसोदाबेन चिमनलाल
[
1]
शैक्षिक सम्बद्धता दिल्ली विश्वविद्यालय
गुजरात विश्वविद्यालय
धर्म हिन्दू
हस्ताक्षर
जालस्थल आधिकारिक जालस्थल
नरेन्द्र दामोदरदास मोदी (, गुजराती: નરેંદ્ર દામોદરદાસ મોદી; जन्म: १७ सितम्बर १९५०) भारत के वर्तमान प्रधानमन्त्री हैं। 
भारत के राष्‍ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें २६ मई २०१४ को भारत के प्रधानमन्त्री पद की शपथ दिलायी।[2]
[3] वे स्वतन्त्र भारत के १५वें प्रधानमन्त्री हैं तथा इस पद पर आसीन होने वाले स्वतंत्र भारत में जन्मे प्रथम व्यक्ति हैं।

उनके नेतृत्व में भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने २०१४ का लोकसभा चुनाव लड़ा और २८२ सीटें जीतकर अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की।[4] 
एक सांसद के रूप में उन्होंने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी वाराणसी एवं अपने गृहराज्य गुजरात के वडोदरा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा और दोनों जगह से जीत दर्ज़ की।[5]
[6]

इससे पूर्व वे गुजरात राज्य के १४वें मुख्यमन्त्री रहे। उन्हें उनके काम के कारण गुजरात की जनता ने लगातार ४ बार (२००१ से २०१४ तक) मुख्यमन्त्री चुना। गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त नरेन्द्र मोदी विकास पुरुष के नाम से जाने जाते हैं और वर्तमान समय में देश के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से हैं।।
[7] माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर भी वे सबसे ज्यादा फॉलोअर वाले भारतीय नेता हैं।
[8] टाइम पत्रिका ने मोदी को पर्सन ऑफ़ द ईयर २०१३ के ४२ उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया है।
[9]

अटल बिहारी वाजपेयी की तरह नरेन्द्र मोदी एक राजनेता और कवि हैं। वे गुजराती भाषा के अलावा हिन्दी में भी देशप्रेम से ओतप्रोत कविताएँ लिखते हैं।[10]

Wednesday, 21 December 2016

जब मेरा भी समय आएगा

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नमस्कार दोस्तों आज मैं आपको बताने जा रहा हूं एक ऐसी कविता जो अपने अंतर्मन को छू जाएगी

जब तेरा भी समय आएगा
अपने कर्म किए जा मन से 
क्यों झिझकता ,डरता है इस जग से 
आलोचना करना इस जग की रीत है 
सफल होगा अवश्य अगर लक्ष्य से प्रीत है 
इन कुटिल मुस्कानों पर ताला लग जाएगा 
जब तेरा भी समय आएगा 

 देख हर महान को, वह भी लक्ष्य पर अड़ा था 
चाहे संसार सारा उसके विरोध में खड़ा था 
हंसकर तू चल चाहे कितनी कठिन कठिन हो डगर  दृढ़निश्चय है तो तू तर जाएगा सागर 
अनुमानों का मेघ यूं ही धरा रह जाएगा
जब तेरा भी समय आएगा 

संसार बने ज्वाला तो तू शीतल जल बन 
अनुभवों के निर् से सींच तू जीवन उपवन 
झांक तू अंतर्मन में पथ तुझे यही दिखेगा 
मत घबरा पराज्यों से इनसे ही तो सीखेगा 
प्रयासों के दीये से हर अंधकार मिट जाएगा 
जब तेरा भी समय आएगा

Soteli mata or beta

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हेलो दोस्तो आपका स्वागत है आज आपको बताने  जा रहा हूं इस वीडियो के बारे में जिसमें एक बेटे का दर्द है 
सौतेली मां और बेटे की कहानी है आपको यह देखकर आंखों में आंसू आ जाएगा

Monday, 19 December 2016

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2.हेलो दोस्तो आपका स्वागत है
 आज हम बात करते हैं वह सक्सियत की जिन्होंने पानी के लिए बहुत कुछ किया !
उनमें से एक उपलब्धि है तालाब 
उनका नाम   ((अनुपम मिश्रा जी))
......................…..राजा इतने तन्मय हो जाते कि उस दिन उनके कंधे से किसी का भी कंधा टकरा सकता था। जो दरबार में भी सुलभ नहीं, आज वही तालाब के दरवाजे पर मिट्टी ढो रहा है। राजा की सुरक्षा की व्यवस्था करने वाले उनके अंगरक्षक भी मिट्टी काट रहे हैं, मिट्टी डाल रहे हैं। उपेक्षा की इस आँधी में कई तालाब फिर भी खड़े हैं। देश भर में कोई आठ से दस लाख तालाब आज भी भर रहे हैं और वरुण देवता का प्रसाद सुपात्रों के साथ-साथ कुपात्रों में भी बाँट रहे हैं। उनकी मजबूत बनक इसका एक कारण है, पर एकमात्र कारण नहीं । तब तो मजबूत पत्थर के बने पुराने किले खंडहरों में नहीं बदलते। कई तरफ से टूट चुके समाज में तालाबों की स्मृति अभी भी शेष है। स्मृति की यह मजबूती पत्थर की मजबूती से ज्यादा मजबूत है।’

जल संसाधनों के संरक्षण व पर्यावरण चेतना के  योगदान के लिए अनुपम को 1996 में इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड व मध्यप्रदेश को उन्होंने अपनी कार्यस्थली बनाया। यहां उन्होंने कुओं, बावडिय़ों, तालाबों व बरसाती नदियों के संरक्षण की मुहिम को संबल प्रदान किया।  अनुपम मानते हैं कि वर्ष 2050 में जब भारत की जनसंख्या डेढ़ अरब का आंकड़ा पार चुकी होगी तो देश के सामने जल-संकट एक बड़ी चुनौती के रूप में उपस्थित होगा। लेकिन देश के नीति नियंता इस मुद्दे पर गंभीर नजऱ नहीं आते। उनका स्पष्ट मानना है कि पानी का कोई विकल्प नहीं हो सकता, इसकी पर्याप्त उपलब्धता के लिए व्यापक स्तर पर मुहिम चलाने की आवश्यकता है। 

वे परंपरागत वर्षा जल-संरक्षण की पुरजोर वकालत करते हैं, ताकि वर्षपर्यंत पेयजल की उपलब्धता बनी रहे। वे इसके लिए गैर-सरकारी संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, विकास एजेंसियों तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े समूहों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हैं। उनका मानना है कि स्वदेशी तकनीकों के बलबूते पर न केवल हम पेयजल जुटा सकते हैं बल्कि सिंचाई के साधन भी विकसित कर सकते हैं। वे कुओं को पेयजल व सिंचाई जल का महत्वपूर्ण स्रोत मानते हैं। इन कुओं की सफाई व पुनर्जीवन पर वह विशेष बल देते हैं। इसके साथ ही वे भूमि की जलसंग्रहण की परंपरागत तकनीक को बढ़ावा देने की बात करते हैं। वे राजनीतिक उदासीनता को दुखद बताते हुए कहते हैं कि इसके चलते देश में जल संरक्षण चेतना का समुचित विकास नहीं हो पाया।

उनकी स्पष्ट धारणा है कि जल संरक्षण प्रकृति व संस्कृति की रक्षा की अनिवार्य शर्त है। देश में भौगोलिक विषमता के चलते कुछ इलाकों में अकूत जल-संपदा विद्यमान है तो कुछ इलाकों में निपट सूखा है। इस असंतुलन को दूर करने की सख्त जरूरत है। इसमें सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति व जन समुदायों की सक्रिय भागीदारी की जरूरत है। उनके इस अभियान को सार्थक बनाने वाले तरुण भारत संघ के योगदान की दुनियाभर में चर्चा होती है जिसे इस योगदान के लिए ‘मैगसेसे पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया है।

उल्लेखनीय पहलू यह है कि अनुपम जल संरक्षण की स्वदेशी तकनीकों के पक्षधर रहे हैं। वे मानते हैं कि हमारे पुरखे सही मायनों में जल इंजीनियर थे लेकिन हम उनकी तकनीकों व अपनी विरासत का संरक्षण नहीं कर पाये। आज परंपरागत जल-स्रोत दम तोड़ रहे हैंं। आज वर्षा जल प्रबंधन-संरक्षण वक्त की दरकार है। उनकी मान्यता है कि पश्चिम जीवनशैली में पानी के दुरुपयोग के संस्कार समाहित हैं जिससे बचकर हम जल की बचत कर सकते हैं।


अनुपम पानी की तरह खरे थे। वे कहते थे कि ‘आज तो हमारी भाषा ही खारी हो चली है। जिन सरल, सजल शब्दों की धाराओं से वह मिठी बनती थी उन धाराओं को बिल्कुल नीरस, बनावटी, पर्यावरणीय, परिस्थितिक जैसे शब्दों से बाँधा जा रहा है। अपनी भाषा, अपने ही आंगन में विस्थापित हो रही है। वह अपने ही आंगन में पराई बन रही है।’ उनकी बातें बार-बार याद आती रहेंगी। यंू तो अनुपम हममें से किसी एक के लिए नहीं बल्कि हरेक के लिए एक अनुपम अनुभव की तरह हैं लेकिन मध्यप्रदेश वालों के लिए कुछ खास। हां, अनुपम की यादों को अनुपम बनाये रखने के लिए जरूरत है कि हम सब पानी के जतन के लिए उनके प्रयासों को आगे बढ़ायें और जाने की पानीदार समाज हो जाने में हमें क्या कुछ करना होगा। वे सरकारी तंत्र के साथ काम जरूर करते थे लेकिन सरकारों पर उनकी निर्भरता बिलकुल भी नहीं थी। हम भी उनसे सीख लें ताकि पानी की यह अनुपम बूंदें उनके होने का अहसास दिलाती रहे

--तालाब

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1.हेलो दोस्तो एक बार फिर से आपका स्वागत है
 आज हम बात करते हैं वह सक्सियत की जिन्होंने पानी के लिए बहुत कुछ किया !
उनमें से एक उपलब्धि है तालाब

मीठे पानी की तरह अनुपम। अपने नाम को सार्थकता प्रदान करते हुए अनुपम ने 68 वर्ष की जिंदगी में सुप्त और लुप्त होते समाज में पानी के प्रति चेतना जागृत करने की जो कोशिशें की, उन कोशिशों के बीच अनुपम मिश्र नाम का यह व्यक्तित्व हमारे साथ रहेगा, चलेगा और हमें दिशा देता रहेगा। तालाब आज भी खरे हैं उनके नाम के अनुरूप अनुपम कृति है लेकिन पानी के प्रति लोगों में जागरूकता की उनकी हर कोशिश अनुपम रही है। गीतकार भवानीप्रसाद मिश्र और सरला ने बहुत समझ कर उनका नाम अनुपम रखा होगा। यह बात भी सच है कि भवानीभाई गीतफरोश लिख कर अमर हो गए तो उनका चिराग पानीदार समाज देखने की चिंता में एक उम्र गुजार गया। यह कहना गैरवाजिब होगा कि अनुपम के बाद पानीदार समाज की चिंता करने वाले नहीं होंगे बल्कि यह कहना वाजिब होगा कि उन्होंने पानीदार समाज की चिंता करने के लिए एक बड़ी फौज तैयार कर रखी है। ये लोग समूहों में बंटे  हुए हैं। अपने अंचलों और अपने लोगों के बीच, समुदाय के बीच काम कर रहे हैं। इनकी चर्चा नहीं होती है लेकिन इनके काम इनकी आवाज और पहचान है। इनके कामों में अनुपम बसे हुए हैं। आखिर अनुपम तो अनुपम ही हैं ना।

मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है कि वह जिस तरह देश का ह्दय प्रदेश कहलाता है, वैसा ही उसे सपूत मिला अनुपम मिश्र के नाम का जिसने तालाबोंं और कुंओं से सूखते पानी को बचाने में न केवल लोगों को जगाया बल्कि समाज की आंखों में सूखते पानी को बचाने की कोशिश की। अनुपम का जन्म उसी वर्धा में हुआ जहां गांधी की यादें बसी हुई है और जिस शहर में गांधी की हवा, वहां अनुपम ही पैदा होते हैं, यह बात एक बार फिर साबित हो गई। सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर पानी के जतन के लिए जो कोशिश अनुपम ने किया, वह बेमिसाल है। ‘तालाब आज भी खरे हैं’ उनकी अनुपम कृति है और एक ऐसी रचना जो सदियों सदियों तक पानीदार समाज की धरोहर होगी। पानी बचाने और उसके जतन के लिए क्या किया जा सकता है कि चर्चा इस किताब के बिना नहीं हो पाएगी।  

अनुपम मिश्र की छाप जाने माने लेखक, संपादक, छायाकार और गांधीवादी पर्यावरणविद् की है। पर्यावरण-संरक्षण के प्रति जनचेतना जगाने और सरकारों का ध्यानाकर्षित करने की दिशा में वह तब से काम कर रहे हैं, जब देश में पर्यावरण रक्षा का कोई विभाग नहीं खुला था। आरम्भ में बिना सरकारी मदद के अनुपम मिश्र ने देश और दुनिया के पर्यावरण की जिस तल्लीनता और बारीकी से खोज-खबर ली है, वह कई सरकारों, विभागों और परियोजनाओं के लिए भी संभवत: संभव नहीं हो पाया है। उनकी कोशिश से सूखाग्रस्त अलवर में जल संरक्षण का काम शुरू हुआ जिसे दुनिया ने देखा और सराहा। सूख चुकी अरवरी नदी के पुनर्जीवन में उनकी कोशिश काबिले तारीफ रही है। इसी तरह उत्तराखण्ड और राजस्थान के लापोडिय़ा में परंपरागत जल स्रोतों के पुनर्जीवन की दिशा में उन्होंने अहम काम किया है।


यहां उनका लिखा स्मरण करना जरूरी हो जाता है जिसमें वे लिखते हैं कि - तालाब का लबालब भर जाना भी एक बड़ा उत्सव बन जाता। समाज के लिए इससे बड़ा और कौन सा प्रसंग होगा कि तालाब की अपरा चल निकलती है। भुज (कच्छ) के सबसे बड़े तालाब हमीरसर के घाट में बनी हाथी की एक मूर्ति अपरा चलने की सूचक है। जब जल इस मूर्ति को छू लेता तो पूरे शहर में खबर फैल जाती थी। शहर तालाब के घाटों पर आ जाता। कम पानी का इलाका इस घटना को एक त्योहार में बदल लेता। भुज के राजा घाट पर आते और पूरे शहर की उपस्थिति में तालाब की पूजा करते तथा पूरे भरे तालाब का आशीर्वाद लेकर लौटते। तालाब का पूरा भर जाना, सिर्फ एक घटना नहीं आनंद है, मंगल सूचक है, उत्सव है, महोत्सव है। वह प्रजा और राजा को घाट तक ले आता था। पानी की तस्करी? सारा इंतजाम हो जाए पर यदि पानी की तस्करी न रोकी जाए तो अच्छा खासा तालाब देखते-ही-देखते सूख जाता है। वर्षा में लबालब भरा, शरद में साफ-सुथरे नीले रंग में डूबा, शिशिर में शीतल हुआ, बसंत में झूमा और फिर ग्रीष्म में? तपता सूरज तालाब का सारा पानी खींच लेगा। शायद तालाब के प्रसंग में ही सूरज का एक विचित्र नाम ‘अंबु तस्कर’ रखा गया है। तस्कर हो सूरज जैसा और आगर यानी खजाना बिना पहरे के खुला पड़ा हो तो चोरी होने में क्या देरी? सभी को पहले से पता रहता था, फिर भी नगर भर में ढिंढोरा पिटता था। राजा की तरफ से वर्ष के अंतिम दिन, फाल्गुन कृष्ण चौदस को नगर के सबसे बड़े तालाब घड़सीसर पर ल्हास खेलने का बुलावा है। उस दिन राजा, उनका पूरा परिवार, दरबार, सेना और पूरी प्रजा कुदाल, फावड़े, तगाडिय़ाँ लेकर घड़सीसर पर जमा होती। राजा तालाब की मिट्टी काटकर पहली तगाड़ी भरता और उसे खुद उठाकर पाल पर डालता। बस गाजे- बाजे के साथ ल्हास शुरू। पूरी प्रजा का खाना-पीना दरबार की तरफ से होता। राजा और प्रजा सबके हाथ मिट्टी में सन जाते। राजा इतने तन्मय हो  जाते.....
इसके आगे का पोस्ट देखिए नेक्स्ट smartlifestory.blogspot.com

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दोस्तों फिर से एक बार आपका बहुत-बहुत स्वागत है आज हम आपको बताने जा रहे हैं यह घोस्ट स्टोरी

(रेहम हॉल की ब्राउन लेडी)

नोरफॉक इंग्लैंड के रेहम हॉल में 1936 में कैमरे में कैद हुए इस साये को ब्राउन लेडी कहा जाता था। इसमें भूरे रंग के बूटेदार कपड़े पहनी हुई महिला को देखा गया था। इसका नाम लेडी डोरोथी था, जो चार्ल्स टाउनशेंड नामक व्यक्ति की दूसरी पत्नी थी। महिला को विश्वासघात करने पर सजा के रूप में घर में बंद कर दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई थी। कई लोगों के साथ जॉर्ज पंचम ने भी कहा था कि उन्होंने एक भूरी महिला को देखा है। अंत में एक दिन उसकी तस्वीर देख कर उनके होश उड़ गए। बाद में यह तस्वीर लाइफ मैगजीन में भी प्रकाशित हुई

लव स्टोरी

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हेलो फ्रेंड फिर से एक बार आपका स्वागत है स्मार्ट लव स्टोरी में
आज हम आपको एक ऐसे स्टोरी से रूबरू कराने जा रहे हैं जिसमें सिर्फ प्यार ही प्यार भरा होता है
 एक गरीब लड़की थी। उसके पिता किसी दुकान पर मजदूरी करते थे और मां घरों में चौका बरतन। वह अपने मां-बाप की इकलौती लड़की थी, इसलिए उन्होंने उसे बड़े लाड प्यार से पाला था। वे चाहते थे कि वह पढ़ लिख कर बड़ी आदमी बने, जिससे उसे गरीबी में दिन न गुजारने पड़ें।

जब उसने गांव के स्कूल से 10वीं का इक्ज़ाम पास किया, तो बहुत खुश हुई। मां-बात ने किसी तरह पैसोें का जुगाड़ करके गांव से 8 किमी0 दूर के कस्बे में उसका इंटर कॉलेज में नाम लिखा दिया। वह साइकिल से स्कूल जाने लगी। इस तरह से उसकी जिंदगी आगे बढ़ने लगी।दिन उसकी जिंदगी में एक नया मोड़ आया। स्कूल से निकलते वक्त एक लड़का बाइक लेकर उसके पास आया और धीरे से बोला- अगर आप बुरा न मानें तो मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूं। 

लड़की उस लड़के को अक्सर रास्ते में देखा करती थी। जब भी वह स्कूल आती और स्कूल से जाती, वह लड़का सडक के किनारे खड़ा उसे निहारा करता। पहले शुरू में तो उसे यह सब अच्छा नहीं लगा, लेकिन धीरे-धीरे वह भी उसे अच्छा लगने लगा था। इसलिए जब उस लड़के ने कहने की अनुमति मांगी, तो उसने धीरे से सिर हिलाकर अनुमति दे दी।

उस लड़के ने अपनी शर्ट की जेब से एक गुलाब की कली निकाल कर उसके हाथ में रख दी और उसकी मुटठी बंद करते हुए बोला- ''मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। उठते-बैठते, सोते जगते हर समय बस तुम्हारे बारे में सोचा करता हूं। मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता है....''
लड़का और भी बहुत कुछ कहना चाहता था, पर लड़की ने धीरे से उसके होठों पर अपना हाथ रख कर उसके प्यार का इकरार कर लिया। इस तरह उन दोनों में बात-चीत की शुरूआत हो गयी। लड़का रोज उसके लिए कोई न कोई गिफ्ट लाता और उसके लिए जीने मरने की कसमें खाता। उसकी बातें सुनकर लड़की दीवानी हो जाती और ख्वाबों की दुनिया में खो जाती।

एक दिन वह लड़का उस लड़की को अपनी बाइक पर घुमाने ले गया। दोनों लोग नदी के किनारे पहुंचें और घास पर बैठ कर बातें करने लगे। लेकिन लड़के की मंशा तो कुछ और थी। लेकिन प्यार में अंधी हो चुकी वह लड़की उसकी मंशा समझ नहीं पाई और उसने अपने आप को लड़के के हवाले कर दिया। दोनों लोग एक दूसरे के प्यार में ऐसे खोए कि दो जिस्म एक जान हो गये।

लेकिन न जाने कहां से वहां पर तीन लड़के आ गये। उन्हें देखकर लड़की हक्का-बक्का रह गयी और अपने कपड़े सही करने लगी। यह देख कर एक लड़का उसका हाथ पकड़ता हुआ बोला- इतनी भी क्या जल्दी है मेरी रानी, हम भी तो तुम्हारे दिवाने हैं। थोड़ा हमारा भी तो मनोरंजन कर दो।

लडकी ने अपने प्रेमी से मदद मांगी। मगर वह यह सब देखकर हंसता रहा। यह देख कर लड़की का हृदय धक्क से रह गया। यानी कि यह सब इसकी चाल थी?

आगे लड़की कुछ सोच ही नहीं पाई। क्योंकि वे तीनों लड़के उसके शरीर पर भूखे भेडिए की तरह टूट पड़े और अपनी हवस की आग बुझाते रहे। वह लड़की मदद के लिए चिल्लाती रही और वे उसे नोचते-घसोटते चले।

लगभग एक घंटे के बाद लड़की को होश आया, तो उसने अपने आपको नंग-धडंग पाया। वे तीनों लड़के और उसका प्रेमी वहां से जा चुके थे। लड़की की आंखों के आगे अंधेरा छा रहा था। उसकी दुनिया अंधेरे से भर चुकी थी। उसे अपना जीवन समाप्त होता हुआ लग रहा था। 

वह सोचती रही कि क्यों उसने उस बेवफा लड़के की बातों पर ऐतबार किया। क्यों मैं उसके साथ यहां पर आई। अब मैं क्या मुंह लेकर अपने घर जाऊंगी। अपने मां-बाप को क्या बताऊंगी। मेरा ये हाल देखकर वे तो जीतेजी मर जाएंगे। 

लड़की का गला बुरी तरह से सूख रहा था। वह किस तरह घि‍सटती हुई नदी के किनारे पहुंची। नदी का पानी कल-कल करता हुआ तेजी से बह रहा था। लड़की ने एक बार फिर अपने मजबूर मां-बाप, अपने बेवफा प्रेमी के बारे में सोचा और फिर नदी में छलांग लगा दी। 

अगले ही पल वह नदी में डूबने उतराने लगी। लेकिन अब न तो वह किसी को अपनी जान बचाने के लिए पुकार रही थी और न ही बचने के लिए संघर्ष कर रही थी। उसका मन ठहरे हुए जल की शांत था। वह भी अपने बेवफा प्रेमी के बारे में सोच रही थी कि क्यों उसने उसकी बातों पर इस तरह से ऐतबार कर लिया, क्यों मैंने उससे अंधा प्यार किया, क्यों मैंने उसके प्यार को जरूरत नहीं समझी? अगर मैं ऐसा कर पाती, तो शायद..... और फिर वह नदी की गहराई में डूबती चली गयी। 

दोस्तो किसी से प्यार करना, किसी पर ऐतबार करना बुरा नहीं है, लेकिन जज्बातों को पहचानने की क्षमता भी रखिए। किसी को अपना तन-मन सौंपने से पहले उसके परिणामों के बारे में भी जरूर सोचिए। नहीं तो आप भी धोखा खा सकते हैं, आप भी ठगे जा सकते हैं।