Thursday, 19 January 2017

आखिर सड़कों पर मौत कब तक ????

Smartlifestory

Dosto namaskar ek baar phir aap ka yaha par Swagat hai 

aaj mai aap ke liye Lekar Aaya Hoon ऐसी खबर जिसे देखकर आप चौंक जाएंगे

 हमारे देश में प्रतिमाह सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या कई देशों में प्रतिवर्ष मरने वालों से कहीं ज्यादा रहती है
वर्ष 2015 की 'रोड एक्सीडेंट रिपोर्ट' के अनुसार सड़क हादसों में देश में 1,46,133 लोगों की जानें गईं हैं।।।



इसके लिए राज्य सरकार को विशेष रुप से 'सड़क सुरक्षा उपकरण' लगाकर जनसंख्या व वाहनों की संख्या की बढ़ोतरी के  अनुरूप यातायात से जुड़े विभागों को विशेष संसाधन उपलब्ध करवाने होंगे ।
उनकी नफरी में भी वर्दी करनी होगी।
विडम्बना यह है कि पढ़े लिखे लोग भी चौराहे या मोड़ क
पर यदि ट्रैफिक का सिपाही नहीं खड़ा है तो भेड़ चाल की तरह चलते ही रहते हैं।
"गति सीमा" व "रुकिए" के निशान का शायद ही कोई ध्यान रखता है।
 दरअसल नियम को तोड़ने वालों, यातायात अधिकारियों व दलाल जो कानून पालना की बजाए मिलीभगत से मामला निपटाने में ज्यादा विश्वास रखते हैं , के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा जाना जरूरी है।
 अन्यथा नए मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2016 में किए जा रहे सख्त दंडात्मक प्रावधानों का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।।

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